महानदी पुल पर इतने बड़े और गहरे गड्ढे हो गए हैं कि बारिश का पानी भरने के बाद इनकी गहराई का अंदाजा लगाना असंभव है, जिससे वाहन चालकों के अनियंत्रित होने का खतरा बना रहता है।

जानलेवा सरिया,, दोनों ही पुलों पर डामर उखड़ने के बाद पुल की लोहे की छड़ें पूरी तरह बाहर निकल आई हैं, जो दोपहिया वाहन के टायरों को कभी भी फाड़ सकती हैं।

लाखों खर्च के बाद भी ढाक के तीन पात ….

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ महीने पहले ही लोक निर्माण विभाग द्वारा महानदी पुल की मरम्मत पर लाखों रुपये बहाए गए थे, लेकिन सही रूप से निर्माण कार्य नहीं होने के चलते कुछ ही दिनों में सड़क फिर से छलनी हो गई।

स्थानीय लोगों और राहगीरों में शासन-प्रशासन के खिलाफ नाराजगी है, जो किसी बड़े जानलेवा हादसे के टकटकी लगाकर इंतजार कर रहे हैं

अधिकारियों की कार्यशैली पर खड़े हो रहे सवाल …..

ग्रामीणों ने तीखा सवाल उठाया है कि आखिर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी चंद महीनों में पुल की यह दुर्गति कैसे हो गई इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच होनी चाहिए ताकि जनता के टैक्स के पैसों की बर्बादी करने वाले और घटिया काम करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।

प्रतापपुर और अंबिकापुर जैसे व्यस्त मार्गों पर स्थित इन दोनों पुलों की बदहाली से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। जनता और राहगीरों ने प्रशासन से मांग की है कि किसी अनहोनी के होने से पहले युद्ध स्तर पर इन पुलों की गुणवत्तापूर्ण मरम्मत कराई जाए।