प्रियंका की माता दुर्गावती सिंह गृहिणी हैं, जबकि उनके बड़े भाई कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। पारिवारिक परिस्थितियों के बीच निरंतर मेहनत, लगन और लक्ष्य के प्रति समर्पण के बल पर प्रियंका ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की। NEET में चयन के बाद उनका प्रवेश शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, महासमुंद (छत्तीसगढ़) में हुआ है, जहां वह चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करेंगी।

प्रियंका की सफलता पर सोशल एक्टिविस्ट एवं जिला अध्यक्ष, सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग, सूरजपुर ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

बी.पी.एस. पोया ने कहा कि प्रियंका सिंह गोंड समाज और आदिवासी समुदाय की बेटी हैं। उनकी सफलता पूरे समाज के लिए गौरव का विषय है और ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों में चिकित्सा, इंजीनियरिंग सहित विभिन्न व्यावसायिक एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्रों में आगे बढ़ने की रुचि लगातार बढ़ रही है। यह शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

उन्होंने कहा कि प्रियंका की उपलब्धि केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा है, जो ग्रामीण परिवेश में रहते हुए सीमित संसाधनों के बीच बड़े लक्ष्य निर्धारित करते हैं। उन्होंने युवाओं से लक्ष्य तय कर निरंतर मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

पोया ने कहा कि ग्रामीण एवं आदिवासी विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए उचित मार्गदर्शन एवं सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में उनकी टीम लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने प्रियंका को चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में सफलता के साथ आगे बढ़ने तथा भविष्य में समाज और देश की सेवा करने के लिए शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर बोधन सिंह पोर्ते, ब्लॉक उपाध्यक्ष, गोंडवाना गोंड महासभा, सूरजपुर; रामप्रसाद सिंह कोर्राम, सरपंच प्रतिनिधि, मानी; शिव भजन सिंह मरकाम; दीनदयाल सिंह उर्रे, सहायक शिक्षक; गुलाब सिंह नेताम, ब्लॉक अध्यक्ष, सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग, रामानुजनगर; गौरीशंकर सिंह नेताम, जिला कार्यकारिणी सदस्य, सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग, सूरजपुर तथा अयोध्या सिंह मरकाम, सामाजिक कार्यकर्ता, सूरजपुर सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।