मृतक छात्र प्रिंस सिंह, पिता विजेन्द्र सिंह, ग्राम पंचायत टेंगनी के हरपियारा गांव का निवासी था। वह करीब दो दिन पहले ही मझारटोला स्थित आदिवासी बालक आश्रम में दाखिल हुआ था और वहां रहकर कक्षा चौथी की पढ़ाई कर रहा था।
जानकारी के अनुसार 8 सितंबर की सुबह करीब 7 बजे छात्र आश्रम में मौजूद नहीं मिला। इसके बाद उसकी तलाश शुरू की गई। आरोप है कि छात्र के लापता होने की जानकारी परिजनों को करीब शाम 4 बजे दी गई। परिजन भी बच्चे की तलाश में जुट गए। इसी बीच बुधवार सुबह आश्रम के पास स्थित तालाब में छात्र का शव दिखाई दिया। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तथा शव को बाहर निकालकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि छात्र आश्रम से बाहर कैसे निकला और वह तालाब तक कैसे पहुंचा उसकी अनुपस्थिति का पता चलने के बाद परिजनों और उच्चाधिकारियों को तत्काल सूचना क्यों नहीं दी गई? इन सवालों का जवाब अब प्रशासनिक जांच में तलाशा जाएगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रोक्तिमा यादव ने आश्रम अधीक्षक अशोक एक्का को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रशासन ने छात्र के आश्रम में नहीं होने की जानकारी उच्चाधिकारियों को नहीं देने को कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही माना है।
पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी एसडीएम सोनहत को सौंपी गई है। जांच में छात्र के आश्रम से बाहर जाने की परिस्थितियों, उपस्थिति एवं निगरानी व्यवस्था तथा संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
घटनास्थल पर अपर कलेक्टर एसके वैद्य, एसडीएम, तहसीलदार, आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त, सोनहत थाना प्रभारी सहित पुलिस और प्रशासन की टीम मौजूद रही। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है। मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही हो सकेगा।
मासूम की मौत से परिवार में मातम पसरा है। परिजनों के मुताबिक उन्होंने महज दो दिन पहले ही बच्चे को आश्रम भेजा था और अब उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
घटना के बाद प्रशासन ने जिले के सभी आश्रमों एवं छात्रावासों में बच्चों की नियमित उपस्थिति, सुरक्षा और सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।





